क्या आप सर्जरी के नाम से डरते हैं? सर्जरी का नाम सुनते ही दर्द, बड़े-बड़े चीरे और लंबी रिकवरी का ख्याल आता है, लेकिन अब समय बदल गया है। अब सर्जरी का मतलब केवल बड़ी चीरे और भारी दर्द नहीं रह गया है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery), जिसे “कीहोल सर्जरी” (Keyhole Surgery) भी कहा जाता है, ने चिकित्सा जगत में एक क्रांति ला दी है और पारंपरिक सर्जिकल प्रक्रियाओं को एक नया आयाम दिया है, जिसमें कम दर्द, कम संक्रमण, और तेजी से रिकवरी होती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) के अनुसार, वर्तमान में लापरोस्कोपिक उपयोग की दरें विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में उच्च हैं। बेरिएट्रिक सर्जरी में यह 94.0% है, एंटीरिफ्लक्स सर्जरी में 83.7%, अपेंडेक्टोमी में 79.2%, कोलेस्टेक्टोमी में 77.1%, कोलेक्टोमी में 52.4%, वेंट्रल हर्निया सुधार में 28.1%, और रेक्टल रीसेक्शन में 18.3%। यह सांख्यिकी दिखाती है कि लापरोस्कोपिक सर्जरी विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं के इलाज में मुख्य रूप से उपयोग की जा रही है।आइए इस ब्लॉग पोस्ट में लेप्रोस्कोपी (laparoscopy) सर्जरी के बारे में विस्तार से चर्चा करें।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?
लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) सर्जरी एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक है जिसमें छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं और एक विशेष प्रकार का उपकरण, जिसे लेप्रोस्कोप कहते हैं, का उपयोग किया जाता है। लेप्रोस्कोप (Laparoscope) एक पतली, लम्बी ट्यूब होती है जिसमें एक कैमरा और लाइट जुड़ा होता है। इस कैमरे के माध्यम से सर्जन आपके शरीर के अंदर का दृश्य देख सकता है और छोटे उपकरणों की सहायता से सर्जरी कर सकता है।
किन स्थितियों में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है?
मिरेकल्स अपोलो क्रैडल/स्पेक्ट्रा, गुड़गांव में सर्वश्रेष्ठ सामान्य और लेप्रोस्कोपिक सर्जन (General and Laparoscopic Surgeon) के अनुसार, विभिन्न स्थितियों में लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) सर्जरी की जाती है जैसे की:
1. गैलब्लैडर की समस्याएं (Gallbladder Problems)
- गैलब्लैडर स्टोन्स (Gallbladder Stones): पित्ताशय (गैलब्लैडर) में पत्थर बनने की स्थिति में लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (Laparoscopic Cholecystectomy) की जाती है।
- गैलब्लैडर की सूजन (Cholecystitis): पित्ताशय में सूजन होने पर भी यह सर्जरी की जाती है।
2. पाचन तंत्र के रोग (Digestive System Issues)
- अपेंडिक्स की सूजन (Appendicitis): जब अपेंडिक्स में सूजन या संक्रमण होता है, तो लेप्रोस्कोपिक अपेंडेक्टॉमी (Laparoscopic Appendectomy)की जाती है।
- हर्निया (Hernia): पेट की दीवार में हर्निया के इलाज के लिए लेप्रोस्कोपिक हर्नियोप्लास्टी की जाती है।
- पेट के अल्सर (Stomach Ulcers): कुछ मामलों में पेप्टिक अल्सर के इलाज के लिए यह सर्जरी की जाती है।
3. स्त्री रोग संबंधी समस्याएं (Gynecological Problems)
- ओवेरियन सिस्ट्स (Ovarian Cysts): अंडाशय में सिस्ट्स की स्थिति में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है।
- एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): इस स्थिति में गर्भाशय के बाहर टिश्यू के विकास को हटाने के लिए यह सर्जरी की जाती है।
- हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy): गर्भाशय को निकालने के लिए भी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का उपयोग किया जाता है।
4. मूत्र प्रणाली के रोग (Urinary System Diseases)
- किडनी स्टोन्स (Kidney stones): कुछ मामलों में गुर्दे की पथरी निकालने के लिए।
- प्रोस्टेट सर्जरी (Prostate Surgery): प्रोस्टेट ग्रंथि की समस्याओं के लिए।
5. कैंसर (Cancer)
- कोलन कैंसर (Colon Cancer): कोलन (बड़ी आंत) के कैंसर के इलाज के लिए।
- गाइनेकॉलजिकल कैंसर (Gynecological Cancer): स्त्री रोग संबंधी कैंसर के कुछ मामलों में।
6. अन्य स्थितियां (Other Conditions)
- स्प्लीन की समस्याएं (Spleen Problems): स्प्लीन (तिल्ली) को हटाने के लिए।
- गैस्ट्रोसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD): सीरियस रिफ्लक्स की समस्याओं के इलाज के लिए।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे
लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) तकनीक के कई फायदे हैं जैसे की:
- कम दर्द (Less Pain): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तरह बड़े चीरे नहीं लगाए जाते। छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे मरीज को कम दर्द होता है। कम दर्द के कारण मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है और सामान्य जीवन में लौट आता है।
- तेजी से रिकवरी (Fast Recovery): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद रिकवरी का समय बहुत कम होता है। पारंपरिक सर्जरी में जहां मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक रहना पड़ता है, वहीं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को कुछ ही दिनों में छुट्टी मिल जाती है।
- कम निशान (Less Marks): पारंपरिक सर्जरी में बड़े-बड़े चीरे लगने से शरीर पर स्थायी निशान रह जाते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे शरीर पर बहुत कम निशान पड़ते हैं और यह निशान भी समय के साथ धीरे-धीरे हल्के हो जाते हैं।
- कम संक्रमण का खतरा (Low Risk of Infection): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे होने के कारण संक्रमण का खतरा बहुत कम होता है। कम खुले घाव और कम रक्तस्राव से संक्रमण की संभावना भी कम हो जाती है।
- कम रक्तस्राव (Less Bleeding): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बहुत कम रक्तस्राव होता है। इससे मरीज की सर्जरी के दौरान और बाद में कम खून की जरूरत पड़ती है।
- जल्दी अस्पताल से छुट्टी (Early Discharge from Hospital): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। अधिकतर मामलों में मरीज को एक या दो दिनों में ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, जबकि पारंपरिक सर्जरी में यह समय काफी लंबा हो सकता है।
- कम दवाइयों की आवश्यकता (Less Medicines Required): कम दर्द और तेजी से रिकवरी के कारण मरीज को दर्द निवारक और अन्य दवाइयों की कम आवश्यकता होती है। इससे दवाइयों के साइड इफेक्ट्स (Side Effects) का खतरा भी कम हो जाता है।
- सामान्य जीवन में जल्दी वापसी (Early Return to Normal Life): लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज जल्दी से अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है। यह तकनीक कामकाजी लोगों और उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो अपने दैनिक कार्यों में जल्दी वापसी चाहते हैं।
- बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम (Better Cosmetic Results): छोटे चीरे और कम निशानों के कारण लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कॉस्मेटिक परिणाम बेहतर होते हैं। यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने शरीर की सुंदरता को बनाए रखना चाहते हैं।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे की जाती है?
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparscopic Surgery) एक उच्च तकनीक वाली सर्जिकल प्रक्रिया है जो पारंपरिक खुली सर्जरी (Open Surgery) की तुलना में कई लाभ प्रदान करती है। आइए जानते हैं कि यह सर्जरी कैसे की जाती है।
सर्जरी के पहले (Before Surgery):
- डॉक्टर से परामर्श (Consultation with Doctor): सबसे पहले, डॉक्टर यह तय करने के लिए कि आप प्रक्रिया के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं या नहीं आपकी मेडिकल हिस्ट्री (medical history) और वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करेंगे।
- खाली पेट रहना (Fasting): सर्जरी से पहले आपको कुछ घंटों तक खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है।
- खान-पान में परिवर्तन (Diet Modification): सर्जरी के एक सप्ताह पहले से ही डॉक्टर रोगी को उसके खान-पान और दवा में परिवर्तन करने को कह सकते हैं।
- प्रि-ऑपरेटिव टेस्ट (Pre-operative Tests): कुछ टेस्ट, जैसे ब्लड टेस्ट, ECG, आदि किए जा सकते हैं ताकि आपकी स्थिति का पूरी तरह से आकलन हो सके।
सर्जरी के दौरान
- एनेस्थीसिया (Anaesthesia): सर्जरी से पहले आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया जाएगा, जिससे आप सर्जरी के दौरान बेहोश रहेंगे और कोई दर्द महसूस नहीं करेंगे।
- छोटे चीरे (Small Cuts): आपके पेट में कुछ छोटे-छोटे (लगभग 0.5 से 1 सेंटीमीटर) के 3 से 4 चीरे लगाए जाते हैं। पेट को फुलाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस (carbon dioxide gas) डाली जाती है। इससे सर्जन को अंगों को आसानी से देखने और उपकरणों को स्थानांतरित करने में मदद मिलती है।
- सर्जरी की प्रक्रिया (Surgical Procedure): सर्जन एक चीरे में लेप्रोस्कोप (laparoscope) डालते हैं, जो एक पतली ट्यूब होती है जिसमें कैमरा और लाइट लगी होती है। इससे पेट के अंदर का दृश्य एक मॉनिटर पर दिखाई देता है। बाकी चीरों के माध्यम से अन्य सर्जिकल उपकरण डाले जाते हैं। सर्जन इन उपकरणों की मदद से सर्जरी करते हैं, जैसे अंग निकालना, टिशू काटना, या टांके लगाना।
- सर्जरी पूरी होना (Completion): सर्जरी पूरी होने के बाद, लेप्रोस्कोप और अन्य उपकरण निकाल लिए जाते हैं। चीरे बंद करने के लिए छोटे-छोटे टांके या सर्जिकल टेप का उपयोग किया जाता है। अंत में, पेट में डाली गई गैस निकाल दी जाती है।
सर्जरी के बाद
सर्जरी के बाद आपको रिकवरी रूम में ले जाया जाता है, जहां आपकी स्थिति को मॉनिटर किया जाता है और आपको दर्द निवारक (Pain killer) और एंटीबायोटिक्स (Antibiotic) दवाइयाँ दी जा सकती हैं ताकि दर्द और संक्रमण को रोका जा सके।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद ध्यान देने योग्य बातें
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद रिकवरी का समय अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सही देखभाल और सावधानियों से आप तेजी से स्वस्थ हो सकते हैं और किसी भी जटिलता से बच सकते हैं। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जिन्हें लेप्रोस्कोपी (laparoscopy) सर्जरी के बाद ध्यान में रखना चाहिए।
- डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें (Follow Doctor’s Instructions): सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करें। दवाइयाँ समय पर लें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- आराम करें (Take Rest): सर्जरी के बाद शरीर को पूरी तरह से आराम दें। कुछ दिनों तक अधिक मेहनत वाले कार्यों से बचें, पर्याप्त नींद लें और जरूरत के अनुसार आराम करें।
- चीरे की देखभाल (Incision Care): सर्जरी के दौरान लगे चीरों की देखभाल करें। उन्हें साफ और सूखा रखें। डॉक्टर द्वारा दिए गए ड्रेसिंग को नियमित रूप से बदलें और संक्रमण के किसी भी लक्षण पर ध्यान दें, जैसे कि लालिमा, सूजन, दर्द, या पस।
- खानपान में सावधानी (Carefully Eating): सर्जरी के बाद हल्का और पौष्टिक भोजन करें। अत्यधिक मसालेदार, तैलीय, या भारी भोजन से बचें। अधिक तरल पदार्थ लें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
- शारीरिक गतिविधियाँ (Physical Activities): सर्जरी के बाद धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाएँ। पहले कुछ दिनों तक हल्की गतिविधियाँ करें, जैसे कि कमरे में चलना। धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में वापस आएँ। भारी सामान उठाने (Heavy weight lifting)और जोरदार व्यायाम (vigorous exercise) से कुछ समय तक बचें।
- दर्द और असुविधा का प्रबंधन (Pain and Discomfort Management): सर्जरी के बाद हल्का दर्द और असुविधा सामान्य है। डॉक्टर द्वारा बताए गए दर्द निवारक दवाओं का सेवन करें। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या असामान्य हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- संक्रमण से बचाव (Prevent Infection): संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। चीरों को छूने से पहले और बाद में हाथ धोएं। अगर आपको बुखार, चीरे वाली जगह से पस, या अन्य संक्रमण के लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- फॉलो-अप अपॉइंटमेंट्स (Follow-up Appointments): डॉक्टर के साथ फॉलो-अप अपॉइंटमेंट्स का पालन करें। इससे डॉक्टर आपकी रिकवरी का आकलन कर सकते हैं और किसी भी प्रकार की समस्या का समय रहते समाधान कर सकते हैं।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद सही देखभाल और सावधानियाँ बरतना बेहद जरूरी है। डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें, आराम करें, और अपनी सेहत का ध्यान रखें। सही देखभाल से आप जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं और किसी भी जटिलता से बच सकते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) के बाद ध्यान रखने वाली इन बातों को अपनाकर आप अपनी रिकवरी को और भी बेहतर बना सकते हैं।